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इस लेख में चर्चा के बिंदु होंगे, सबसे पहले बादशाह अकबर के आरंभिक जीवन व लालन- पोषण के बारे में उसके बाद शिक्षा व्यवस्था, तथा बादशाह अकबर के राजनैतिक जीवन की शुरुआत कैसे हुए और अंत में औपचारिक राज्याभिषेक पर चर्चा करेंगे | यहां परीक्षा की द्रष्टि से जितने भी सवाल बनेगे उनके बारे में भी चर्चा करेंगे |
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बादशाह अकबर का आरंभिक जीवन :-
- चंगतई वंश का तीसरा शासक था |
- अकबर का जन्म राजपूत शासक राणा वीरसाल के महल अमरकोट, सिंध (वर्तमान पाकिस्तान) में 15 अक्टूबर, 1542 ई. को हुआ था |
- इस दौरान हुमायूँ राणा वीरसाल की ओर से शाह हुसैन अरधुना के खिलाफ युद्ध में व्यस्त था |
- टार्डी बेग घुड़सवार ने उसे पुत्र प्राप्ति का समाचार दिया |
- कस्तूरी बाँटकर ईश्वर को धन्यवाद दिया |
- युद्ध में शाह हुसैन अरधुना के हारने के बाद हुमायूँ के सामने घुटने टेके, उसके बाद हुमायूँ अपनी पत्नी और पुत्र के साथ जुलाई 1543 ई. में कंधार की सीमा मस्तंग पंहुचा तथा यहाँ उसका सामना अस्करी से हुआ |
- हुमायूँ, हमीदा बानों बेगम के साथ फारस की ओर भागा तथा अकबर शिविर में पड़ा रह गया |
- अस्करी अपने भतीजे को अन्धक के रूप में कंधार ले गया जहां इसकी पत्नी को अकबर पसंद आया और उसने बालक के लालन- पालन की समुचित व्यवस्था की |
- माहम आनगा व इसकी पुत्री जीजी देख रेख की|
बादशाह अकबर के पिता हुमायूँ के युद्धकाल तथा बचपन का इतिहास :-
- 1545 ई. में हुमायूँ ने कारस की सेनाओं की सहायता से कांधार पर आक्रमण किया तो अस्करी ने अकबर को काबुल भेज दिया जहाँ कामरान ने उसे बंदी बना लिया |
- हुमायूँ ने 1545 ई. काबुल का किला जीत लिया तत्पश्चात अकबर की स्वतंत्रता बहाल हुयी और कामरान अज्ञातवास पर निकल गया |
- इसी वर्ष अकबर की सुन्नत हुयी और हुमायूँ ने हमीदा बानो बेगम को मरियम मकानी कहा|
- 1546 ई. में हुमायूँ ने बदखशान पर आक्रमण किया किंतु इसी दौरान बीमार पड़ गया और इसकी मृत्यु की अफवाह फ़ैल गयी|
- इसके बाद कामरान को अपना अज्ञातवास समाप्त करने का अवसर मिल गया आयर उसने नवंबर 1547 ई. को काबुल पर अधिकार कर अकबर को पुनः बंदी बना लिया |
- हुमायूँ ने जब काबुल पर आक्रमण किया तो कामरान ने अकबर को किले के मुख्यद्वार पर लटका दिया और सौभाग्यवश ही उसकी जान बची|
- इस प्रकार यह कहा जा सकता है कि अकबर प्रकृति शिशु था जिसका बचपन उसके माता- पिता से दूर घोर तिरस्कार और तंगहाली के बीच हुआ था |
बादशाह अकबर की शिक्षा व्यवस्था :-
- काबुल पर पुनः सिंहांसनरुढ़ होने के बाद अकबर की औपचारिक शिक्षा की शुरुआत हुयी|
- आरम्भ में मुल्ला जादा को अकबर का शिक्षक बनाया गया उसके बाद, मुल्ला अससुद्दीन इब्राहीम, मौलाना बामजीद, मौलाना अब्दुल कादिर, मुल्ला मीर मुहम्मद और बैरम खां को शिक्षक का भार दिया गया लेकिन इन सबने हुमायूँ के सामने हाथ जोड़ लिए क्योंकि इन सबके बस में अकबर को पढ़ाना मुस्किल था |
- मगर कोई भी शिक्षक अकबर को शिक्षित करने में असफल रहा|
- असल में पढ़ने- लिखने के लिए अकबर की रूचि नहीं थी, इसकी रूचि कबूतर बाजी, घुड़सवारी और कुत्ते पलने में अधिक थी|
अकबर के राजनैतिक जीवन की शुरुआत:-
- 24 जनवरी 1556 ई. हुमायूँ दिल्ली के शेरमण्डल में स्थित पुस्तकालय की सीढ़ियों से गिरकर घायल ही गया तथा इसके दो दिनों के बाद उनकी मृत्यु हो गयी|
- सम्पूर्ण जीवन लुढ़कते हुए व्यतीत किया और अंत में लुढ़कर मर गया|
- राज्य को विद्रोह से बचाने के लिए मुल्ला बेकसी को बादशाह के पकडे पहनकर जनता को झरोखॉ दर्शन करवाए गये |
- इसके साथ- साथ अकबर को 14 फरवरी 1556 को अकबर को हुमायूँ की मृत्य का समाचार प्राप्त हुआ इस दौरान अकबर पंजाब के कलानौर ( गुरदासपुर जिला) में सिकंदर शाह सूरी के खिलाफ पड़ाव डाले हुए थे |
- बैरम खां ने मुगलों की सहमति से अकबर को हिंदुस्तान का शहंशाह घोषित कर दिया हालांकि इसके तीन दिन पूर्व (11 फरवरी 1556) को दिल्ली में अकबर के नाम खुतबा पढ़ा जा चुका था |
- अकबर ने शहंशाह की उपाधि धारण की और बैरम खां को खान -ए-खाना की उपाधि प्रदान की तथा वकील-ए- सल्तनत का पद दिया |
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FAQ
हिंदाल की पुत्री का क्या नाम था?
हिंदाल की पुत्री रुकैया बेगम था जिसका विवाह अकबर के साथ किया गया था|
अकबर गजनी का राज्यपाल कब बनाया गया था ?
नौ वर्ष की अल्पायु में अकबर को नवम्बर 1551 ई. के गजनी का राज्यपाल बनाया गया |
बचपन में अकबर की देख-रेख किसने की थी?
माहम आनगा व इसकी पुत्री जीजी ने अकबर की देख रेख की थी |
बादशाह अकबर चंगतई वंश का कौन सा शासक था?
यह चंगतई वंश का तीसरा शासक था|
हुमायूँ के कितने भाई थे ?
तीन भाई थे जिनका नाम इस प्रकार है अस्करी, कामरान, और हेमतल |
