भारतीय शिक्षा के इतिहास में सैडलर आयोग (Sadler Commission) बहुत महत्वपूर्ण है, इसका गठन 1917 ई. में कलकत्ता विश्वविद्यालय की समस्यायों के अध्यन के लिए डॉक्टर सैडलर के नेतृत्व में किया गया था इस आयोग को सैडलर आयोग (Sadler Commission) के नाम से भी जाना जाता है |
इस आयोग में दो भारतीय भी सामिल थे जिनका नाम डॉक्टर आसुतोष मुखर्जी और डॉक्टर जियाउद्दीन अहमद था, इस आयोग ने कलकत्ता विश्वविद्यालय के साथ- साथ माध्यमिक स्नातकोतरीय शिक्षा पर भी अपना मत व्यक्त किया था |
- ग्रेट निकोबार द्वीप क्या है हिन्दी में निबंध लिखिए।
- बिहार चुनाव : फतुहा विधानसभा (185) राजनैतिक समीकरण, देखिये पूरी रिपोर्ट
- बिहार चुनाव : बेगूसराय विधानसभा (146) का राजनैतिक समीकरण, देखिये पूरी रिपोर्ट
- बिहार चुनाव : अररिया विधानसभा (49) का राजनैतिक समीकरण, देखिये पूरी रिपोर्ट।
- यूपी चुनाव 2027 : दलितों की मायावती से दूरिया क्यों बढ़ रही हैं, देखिये पूरी रिपोर्ट
सैडलर आयोग (Sadler Commission) क्या है :-
1904 ई. के विश्वविद्यालय अधिनियम की सैडलर आयोग ने कड़े शब्दों में निंदा की थी | इंटर व उत्तर माध्यमिक परीक्षा का माध्यम तथा विश्वविद्यालय शिक्षा के मध्य विभाजन रेखा मानना और स्कूली शिक्षा 12 वर्ष की होनी चाहिए |
ऐसी शिक्षण संस्थाएं स्थापित करने का सुझाव दिया गया, जो इंटरमीडिएट महाविद्यालय कहलायें | ये महाविद्यालय चाहते तो स्वतंत्र रहें या फिर हाई स्कूल से सम्ब्रद्ध हो जाएँ, इस संस्थानों के प्रशासन हेतु माध्यमिक तथा उत्तर माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के निर्माण की सिफारिस की गयी |
इंटरमीडिएट के बाद स्नातक की शिक्षा तिन वर्ष की होनी चाहिए इसके लिए विश्वविद्यालय को यह सुझाव भी दिया गया था, कि बहुत शख्त नियम बनाये जाएँ|
कलकत्ता विश्वविद्यालय के कार्य के भार को कम करने के लिए, आयोग ने ढाका में “एकाकी विश्वविद्यालय” की स्थापना का सुझाव दिया और इसने ढाका एवं कलकत्ता विश्वविद्यालय में अध्यापकों के प्रशिक्षण के लिए शिक्षा विभाग खोलने की भी सलाह दी |इसके साथ- साथ इस आयोग ने व्यावसायिक कॉलेज खोलने की ओर भी सरकार का ध्यान खींचा|
सैडलर आयोग के सुझाव पर उत्तर प्रदेश में एक “बोर्ड ऑफ़ सेकेंडरी एजूकेशन” की स्थापना हुयी |
सैडलर आयोग (Sadler Commission) की विशेषताएं :-
- स्नातकोत्तर शिक्षण के लिए कलकत्ता –विश्वविद्यालय की धमता की जाँच करने के इए 14 सितम्बर सन् 1917 ई.को कलकत्ता विश्वविद्यालय आयोग की नियुक्ति की, इस आयोग के अध्यक्ष “डॉ माइकल थॉमस सैडलर (Dr. Michael Ernest Sadler)” लीड्स विश्वविद्यालय के उपकुलपति थे अतः उनके नाम पर इस आयोग को सैडलर आयोग कहा गया |
- इस आयोग की जाँच की विषय “कलकत्ता विश्वविद्यालय की स्थिति एवं आशाओं की जाँच करना और इससे संबंधित समस्याओं का समाधान करने के लिए रचनात्मक नीति पर विचार करने का सुझाव देना था |
- ग्रेट निकोबार द्वीप क्या है हिन्दी में निबंध लिखिए।
- बिहार चुनाव : फतुहा विधानसभा (185) राजनैतिक समीकरण, देखिये पूरी रिपोर्ट
- बिहार चुनाव : बेगूसराय विधानसभा (146) का राजनैतिक समीकरण, देखिये पूरी रिपोर्ट
- बिहार चुनाव : अररिया विधानसभा (49) का राजनैतिक समीकरण, देखिये पूरी रिपोर्ट।
- यूपी चुनाव 2027 : दलितों की मायावती से दूरिया क्यों बढ़ रही हैं, देखिये पूरी रिपोर्ट
- Bihar Election 2025
- Career Guidance
- Country
- Education
- india history
- Literature
- MCQ QUIZ
- NCERT का इतिहास
- Politics
- SSC CGL
- Uttar pradesh
- इतिहास के पन्ने
- झारखण्ड का इतिहास
- देश दुनियां
- बुंदेलखंड का इतिहास
- भारतीय इतिहास
- भारतीय राजनीति इतिहास
- भारतीय राजनेता
- सामाजिक अध्यन
FAQ
इसका गठन 14 सितम्बर सन् 1917 ई. हुआ था इस आयोग के इस आयोग के अध्यक्ष “डॉ माइकल थॉमस सैडलर” थे जोकि उस समय लीड्स विश्वविद्यालय के उपकुलपति थे अतःउनके नाम पर आयोग का गठन किया गया और इसे सैडलर आयोग का नाम दिया |
इसका गठन 14 सितम्बर सन् 1917 ई. हुआ था इस आयोग के इस आयोग के अध्यक्ष “डॉ माइकल थॉमस सैडलर” थे जोकि उस समय लीड्स विश्वविद्यालय के उपकुलपति थे अतःउनके नाम पर आयोग का गठन किया गया और इसे सैडलर आयोग का नाम दिया |
इसे कलकत्ता विश्वविद्यालय आयोग के नाम से भी जाना जाता है |
इस आयोग में दो भारतीय भी सामिल थे जिनका नाम डॉक्टर आसुतोष मुखर्जी और डॉक्टर जियाउद्दीन अहमद था इसको सैडलर आयोग (Sadler Commission) के नाम से भी जाना जाता है |
