हाल ही में आये दिन देखने को मिलता है कि किसी न्यूज पेपर, समाचार चैनल में देखने को मिल जाता है कि नोटबंदी हुई लेकिन इसका इतिहास समझने के लिए वर्तमान से पिछले कुछ वर्षों में जाना जरूरी है। नोटबंदी को अंग्रेजी में Demonetization और हिंदी में विमुद्रीकरण कहते हैं |
नोटबंदी क्या होती है ?
जब किसी देश की सरकारें, बाजार में चल रहे नोटों को पूरी तरह से या कुछ नोटों को बाहर कर दिया जाता है तो इसी घटना को नोटबंदी या demonetization कहते है। आसान शब्दों में ” विमुद्रीकरण, मौजूदा मुद्रा के कुछ प्रकार या मूल्यवर्ग को प्रचलन से वापस लेकर एक मौद्रिक इकाई को वैध स्वीकृति स्थिति को समाप्त की प्रक्रिया है”।
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1850-1855 के बीच के वर्षों में फ्रैंसीसीयों ने सबसे पहले “नोटबंदी” शब्द का उपयोग किया था।
ब्रिटिश भारत में पहली बार 12 जनवरी 1946 को की गयी थी इस समय भारत को आजादी नहीं मिली थी।
यह घटना देश में पहली बार हुई जब इसको (नोटबंदी) साकार करने के लिए सरकार द्वारा 12 जनवरी 1946 को एक अध्यादेश जारी किया गया था इस अध्यादेश ने 500 रूपये,1,000 रूपये और 10,000 के करेंसी नोटों का विमुद्रीकरण कर दिया।
पहली और दूसरी नोटबंदी के कारण और समय :-
हालांकि भारतीय रिजर्व बैंक के इतिहास की रिपोर्ट के अनुसार आरबीआई गवर्नर सी. डी. देशमुख सहमत नहीं थे उनका मानना था नोटबंदी से देश की अर्थव्यवस्था पर आर्थिक संकट आ सकता है।
9.07 करोड़ रुपयों को चलन से बाहर किया था।
1947 के अंत तक कुल 143.47 करोड़ रूपये के उच्च मूल्य वाले नोटों में से 134.9 करोड़ रूपये मूल्य के नोट बदले जा चुके थे। इस प्रकार, 9,07 करोड़ रूपये के नोट चलन से बाहर हो गए या बदले नहीं गए।
वर्ष 1978 में मोरारजी सरकार द्वारा नियुक्त वांचू समिति की सिफारिस के अनुसरण में की गयी थी इस दौरान सरकार ने 16 जनवरी 1978 को 1,000 रूपये, 5,000 रुपये और 10,000 रूपये मूल्यवर्ग के बैंक नोटों का विमुद्रीकरण किया।
आई. जी. पटेल, जोकि 1978 की नोटबंदी योजना के पक्ष में नहीं थे। यह विमुद्रीकरण आजादी के बाद भारत देश में पहली बार हुई थी।
इस विमुद्रीकरण अभ्यास के दौरान, 146 करोड़ रूपये के मूल्य के विमुद्रीकरण नोटों में से 124.45 करोड़ रुपये मूल्य के करेंसी नोट बदले गए और 21.55 करोड़ रूपये की राशि, या 14.76 प्रतिशत विमुद्रीकृत मुंद्रा नोट समाप्त हो गए।
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