बिहार विधानसभा चुनाव अपने चरम पर है इस महादंगल की राजनीति समझना बहुत महत्पूर्ण है। जिस तरह से 1972 के विधानसभा चुनाव के बाद अजीत सरकार का नाम आता है, लोग उन्हें भगवान, माता-पिता से बढ़कर मानते थे। ऐसा कहा जाता है जब वोट मागने जाते तो अपना गमछा (एक तरह का कपड़ा) बिछा देते। लोगों से कहते 1 रुपया डाल दो,वह रुपया लेकर घर जाते और उनको गिनते। इससे उनको पता चल जाता था कितने वोट मिलने वाले हैं।
अजीत सरकार का वोट मागने का तरीका:-
आज तक अजीत सरकार के हत्या की गुच्छी लटकी हुई है, लेकिन जिस तरह से उन्होंने राजनीति की, उसे वर्तमान भी नहीं भुला सकेगा। एक समय था जब उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के 6 बार के विधायक कमलदेव नरायण सिन्हा, वर्तमान पूर्णियां सांसद पप्पू यादव को चुनाव हराकर साबित कर दिया था, उनसे बढ़कर कोई राजनेता नहीं हुआ।
जितने सिक्के होते उन्हें पता चल जाता कि कितने वोट मिलने वाले है इस तरह के CPM नेता अजीत सरकार थे लेकिन 14 जून 1998 में उनकी हत्या के बाद पूर्णियां सांसद पप्पू यादव का नाम सामने आया था लेकिन पत्रकारिता के दौरान सूत्रों के हवाले से जानकारी मिली, हत्या किसी और ने की थी लेकिन नाम वर्तमान सांसद पप्पू यादव का लगया था।
अजीत सरकार का पहला चुनाव (1980)
- इसमें विधानसभा संख्या 139 थी। कुल मतदाता 112675, जिसमें 60971 पुरुष तथा 51791 महिला मतदाता थीं। मतदान के दौरान कुल मतों का 62333 ( 55.32%) मतों का उपयोग हुआ जिसमें 32282 पुरुष, 30051 महिलाओं ने मत किया।
- 1980 के विधानसभा चुनाव में अजीत चंद्र सरकार (27486) ने अपने प्रतिद्वंदी INC(I) उम्मीदवार शरद प्रसाद सिंह(17398) को 10088 (16.52%) मतों से हरा दिया।
दूसरा चुनाव (1985)
- इसमें विधानसभा संख्या 139 थी। कुल मतदाता 137404, जिसमें 70767 पुरुष तथा 56637 महिला मतदाता थीं। मतदान के दौरान कुल मतों का 73621 (57.79%) मतों का उपयोग हुआ जिसमें 48110 पुरुष, 25511 महिलाओं ने मत किया। 1140 चुनाव निर्वाचन के द्वारा असस्वीकर कर दिये गये थे।
- 1985 के विधानसभा चुनाव में अजीत चंद्र सरकार (34790) ने अपने प्रतिद्वंदी INC उम्मीदवार और 6 बार के विधायक कमल देव नरायण सिन्हा (25716) को 9074 (12.52%) मतों से हरा दिया।
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तीसरा चुनाव (1990)
- इस चुनाव के दौरान विधानसभा संख्या 139 ही थी तथा कुल मतदाता 165990, जिसमें 91144 पुरुष, 74846 महिला मतदाता थीं। मतदान के दौरान कुल मतों का 96832 (57.79%) उपयोग हुआ जिसमें 52276 पुरुष, 44556 महिलाओं ने मत किया। 1305 चुनाव निर्वाचन के द्वारा असस्वीकर कर दिये गये थे।
- 1990 के विधानसभा चुनाव में अजीत सरकार (35176) ने अपने प्रतिद्वंदी JD उम्मीदवार रविंद्र नरायण सिंह (25716) को 1615 (1.40%) मतों से हरा दिया।
चौथा चुनाव (1995)
इसमें विधानसभा संख्या 139 थी। कुल मतदाता 198416, जिसमें 106570 पुरुष तथा 19846 महिला मतदाता थीं। इस विधानसभा चुनाव में अजीत सरकार ने वर्तमान पूर्णियां सांसद पप्पू यादव को (SP उम्मीदवार) 1615 मतों से हराया था। हालांकि इसी चुनाव के बाद उनकी हत्या कर दी गयी थीं जिसमें राजेश रंजन उर्फ़ पप्पू यादव का नाम आया लेकिन पटना कोर्ट ने सबूत के अभाव में बरी कर दिया था।
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FAQ
1995 के पूर्णियां विधानसभा से पप्पू यादव को SP के टिकट पर चुनाव लड़ने का मौका मिला था लेकिन अजीत सरकार ने उन्हें 1615 वोटों से हरा दिया था, हालांकि 14 जून 1998 को उनकी हत्या कर दी गयी थी।
अजीत सरकार, लोग जिनको भगवान, माता-पिता की तरह मानते थे लेकिन जिस तरह उनकी हत्या हुई, आज भी रहस्यमय बना हुआ हैं। बिहार के लोग आज भी अजीत सरकार जैसा नेता ढूंढ़ते है।
