कहते हैं दिल्ली की राजनीति बिहार होकर ही जाती है इसमें विधानसभा और लोकसभा ने नेताओं का महत्वपूर्ण योगदान रहता है। पूर्णियां जिले में 5 विधानसभाएँ (Kasba, Banmankhi, Rupauli Damdaha, Purnia) आती हैं जिसमें बीजेपी का पक्ष हमेसा मजबूत रहा है। दमदाहा (Damdaha) विधानसभा में जनता दल यूनाइटेड से 5 बार की विधायिका लेशी सिंह ने जिस तरह से राजनीति की है उससे लगता है महागठबंधन के लिए यहां से जीतना असंभव हो गया लेकिन वर्तमान के परिपेक्ष में बदलाव दिख रहा है। इन्होंने पहला चुनाव वर्ष 2000 में SP नेता दिलीप कुमार यादव को हराकर जीता हालांकि वर्ष 2005 अक्टूबर में दिलीप कुमार यादव ने इन्हें चुनाव हराया भी था |
लेशी सिंह का पहला चुनाव (2000)
दमदाहा विधानसभा का इतिहास भारतीय जनता पार्टी के विपरीत ही रहा इसलिये 1957 से वर्तमान तक बीजेपी कभी नहीं जीत सकी। जदयू महिला नेता मंत्री रही लेशी सिंह ने अपनी राजनीति यहीं से शुरू की और पहला चुनाव जीता। विधानसभा संख्या 125, कुल मतदाता 193855 थे जिसमें 103122 पुरुष, 90743 महिला और 11 सर्विस (1,महिला 10 पुरुष) थे। मतदान के दौरान 129097 मतदाताओं ने अपमे मत का उपयोग किया जिसमें 74595 पुरुष, 54502 महिला थीं।
इस तरह से लेशी सिंह (39432) ने SP उम्मीदवार दिलीप कुमार यादव (25411) को 14021 मतों से हरा दिया। हालांकि इसके बाद दिलीप कुमार यादव राजद से जुड़ गये और 2005 विधानसभा चुनाव (अक्टूबर) इन्होंने लेशी सिंह को हराया था।
लेशी सिंह का दूसरा चुनाव (2005 फरवरी)
जिस तरह से इन्होंने अपनी राजनीति शुरू की और पहला चुनाव जीता उससे लगने लगा था मतदाताओं को आकर्षित कर सकेंगी यहीं कारण था जदयू ने फिर से भरोसा जताया और मैदान में उतार दिया। 2005 फरवरी माह चुनाव के दौरान विधानसभा संख्या 125, कुल मतदाता 213427 थे जिसमें 111348 पुरुष, 102092 महिला और 43 सर्विस मतदाता (13 महिला, 30 पुरुष) थे।
मतदान के दौरान 105892 मतदाताओं ने मत किया किया जिसमें 58199 पुरुष, 47693 महिला थीं। पिछले चुनाव की तरह लेशी सिंह (40587) ने राजद उम्मीदवार दिलीप कुमार यादव (31284) को 9303 मतों से हरा दिया था। हालांकि इससे अगले विधानसभा चुनाव 2005 (अक्टूबर) में दिलीप कुमार यादव ने लेशी सिंह को हरा दिया था।
तीसरा चुनाव (2010)
इस चुनाव में विधानसभा संख्या 61 थी तथा कुल मतदाता 236508, जिसमें 123772 पुरुष, 112736 महिला थीं। लेशी सिंह (64323) ने 2010 विधानसभा चुनाव INC के उम्मीदवार इरशाद अहमद खान (19626) को 44697 भारी मतों से हरा दिया।
इसी तरह 2015 और 2020 के विधानसभा चुनाव में लेशी सिंह का दबदबा रहा और जीत हासिल की लेकिन जिस प्रकार से महागठबंधन अपमे चुनावी रंग में है उससे लगता है दमदाहा की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
हालांकि जदयू का अपना वोट बैंक होने के साथ बीजेपी से गठबंधन से उन्हें फायदा जरूर हो सकता है लेकिन पूर्णियां का इतिहास बताता है ज्यादा वर्षों तक राजनेता, राजनीति नहीं कर सके। एक दौर था जब अजीत सरकार, कमलदेव नरायण सिन्हा जैसे नेताओं ने पूर्णियां जिले का नाम भारत के अनेक राज्यों में गौरान्वित किया।
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जिस तरह से पिछले कुछ दिनों में राहुल गाँधी ने बिहार के दलित, आदिवासी पिछड़े लोगो के अधिकार तथा संविधान बचाओ जैसे मुद्दे को जनता के सामने लेकर गये है उसको देखते हुये बिहार की राजनीति में हड़कंप देखा गया। वहीं दूसरी तरह तेजस्वी यादव ने युवाओं को अपनी तरफ खींचने की कोशिश की। इससे लगता है कि बिहार के मतदाता बदलाव चाहते हैं, ऐसा देखा गया हैं जब बदलाव की बात आती है तो अच्छे-अच्छे नेता चुनाव हार जाते हैं इसलिए लेशी सिंह का चुनाव जीतना असंभव है, हालांकि जीत हार का पता चुनाव के बाद चेलगा।
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