पूर्णियां जिले की सबसे महत्वपूर्ण विधानसभा सीटों में बनमनखी (59,SC) और पूर्णियां विधानसभा (62) है पिछले 25 वर्षों (2000-2025) से भारतीय जनता पार्टी (NDA) एक तरफा जीत रही है, बनमनखी SC रिजर्व सीट का गठन के बाद पहला चुनाव 1962 में हुआ। यह दौर केंद्र में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC)और बिहार में काम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ इंडिया (CPI) का माना जाता है |
बनमनखी विधानसभा सीट का इतिहास
1962 से 1972 तक कांग्रेस रही जिसमें क्रमशः भोला पासवान शास्त्री, बलदेव सराफ तथा ऋषिकलाल ऋषिदेव चुनाव जीते। इन चुनावों को जीतने का श्रेय केंद्र की सत्ता को बताया जाता है इसलिए शुरुआत के 3 चुनाव और तीनों में उम्मीदवारों का चयन अलग -अलग तरीके से हुआ।
1977 के चुनाव में जनता पार्टी के उम्मीदवार बलबोध पासवान ने जीता लेकिन 1980-85 में कांग्रेस ने फिर से वापसी की, हालांकि मतदाताओं को रुझाने में सफल नहीं रहे। सन 1990 में भारतीय जनता पार्टी का उदय हो गया।
सन 2000-2025 तक बनमनखी में बीजेपी का सफर
बनमनखी में जिस तरह से कांग्रेस के वोट बैंक को खत्म करके बीजेपी का उदय हुआ उसने बता दिया की आरएसएस की भूमिका महत्वपूर्ण है। 2000 के विधानसभा में देव नरायण रज्जाक के जीत हासिल करने के यहाँ के लोगों में हिंदुत्व और विकास का भरोसा दिया गया जिससे बीजेपी के प्रचार और मतों में इजाफा हो सके।
बीजेपी ने कैसे अपने मतों को हिंदुत्व और विकास के लिए प्रेरित किया
2005 में, बीजेपी कृष्ण कुमार ऋषि को उम्मीदवार बनती है जिन्होंने लगातार 5 चुनावों में जीत हासिल की। इन्होंने पहले चुनाव में जोकि फरवरी माह में हुआ था जिसमें राजद उम्मीदवार मनोरमा देवी को 4696 वोटों से हराया। हालांकि लोगों का मानना था इस हार के जिम्मेदार पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव है क्योंकि उन्होंने इस चुनाव को बहुत हल्के में लिया था।
2010 के विधानसभा चुनाव में राजद ने धर्मलाल चुनाव ऋषि को टिकट दिया लेकिन बीजेपी विधायक 44890 मतों के बड़े अंतर हरा दिया। पूर्णियां जिले में आज तक की सबसे बड़ी हार मानी जाती है इस तरह से 2015 और 2020 के चुनाव जीते, हलाकि 2015 के चुनाव में राजद उम्मीदवार संजीव कुमार पासवान से मात्र 708 मतों से जीत हासिल की

लेकिन सवाल यह है कि क्या बीजेपी बनमनखी विधानसभा में जीत जारी रखेगी या बदलाव होगा…
हमारे संवाददाता ने यहाँ के लोगों से बात की…
नमस्कार, बनमनखी से 5 बार विधायक रहे कृष्ण कुमार ऋषि के कार्यों से कितना संतुष्ट हैं?
सर उनका काम तो ठीक ही रहा लेकिन पिछले 25 वर्षों से बनमनखी विधानसभा में जो होना चाहिए था वह नहीं हुआ। पिछले चुनावों में मोदी जी के नेतृत्व में जीत गये लेकिन इस बार जनता बदलाव चाहती है। यदि महागठबंधन ने अच्छे नेता को टिकट दिया तो कृष्ण कुमार ज़ी चुनाव हार सकते हैं।
क्या आपको लगता फिर से जीतने की संभावना है या महागठबंधन की तरफ लोगों का झुकाव है?
नहीं, हालांकि बीजेपी में और भी उम्मीदवार हैं, क्या पता हारने के डर की वजह से इनका टिकट काट दिया जाये। ये हिंदुत्ववादी नेता हैं। इस बार तेजस्वी की तरफ झुकाव ज्यादा दिख रहा है।
किसको मुख्यमंत्री देखना चाहते हैं, नीतीश कुमार, तेजस्वी यादव या चिराग पासवान?
सर वैसे तो हम लोग मोदी ज़ी के सपोर्टर हैं लेकिन इस बार बदलाव होना चाहिए। नीतीश के कार्यों से खुश ही हैं लेकिन युवाओं का पलायन, अफ्सरशाही बहुत बड़ी है, बिना घूस के कोई भी काम नहीं होता है। एक बार तेजस्वी यादव को भी देखना चाहिए।
चिराग पासवान और प्रशांत किशोर को किस तरह देखते हैं?
दोनों अपनी जगह ठीक ही हैं लेकिन प्रशांत ज़ी की छवि अच्छी नहीं है लोग कहते है उन्होंने बिहार के लिए क्या किया है? रही बात चिराग पासवान की, वह मुख्यमंत्री बनने के लायक नहीं है, ना ही उनकी पार्टी इतनी बड़ी है इसलिए चिराग पासवान और प्रशांत बिहार में ज्यादा कुछ नहीं कर सकते। मैं खुद चाहता हूँ तेजस्वी यादव को मौका मिलना चाहिए।
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बनमनखी विधानसभा का निष्कर्ष:-
जिस तरह लोगों ने बताया, यहां नेता बहुत अच्छे हैं लेकिन SC रिजर्व सीट होने के कारण चुनाव नहीं लड़ सकते। दूसरी तरफ यह भी कहा, वर्तमान बीजेपी विधायक कृष्ण कुमार ऋषि बहुत मौका दिया अब किसी और को मौका मिलना चाहिए। जीत हार का फैसला चुनाव के बाद होता है लेकिन महागठबंधन अच्छा उम्मीदवार उतारता है तो बीजेपी के लिए मुश्किल हो सकती है।
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