उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव का माहौल अपने चरम पर है जिस तरह बीजेपी ने 2017, 2022 के चुनावों में एक तरफ़ा जीत हासिल करके समाजवादी पार्टी, बहुजन समाजवादी पार्टी और कांग्रेस जैसे बड़े दलों को हास्य पर खड़ा कर दिया। 2022 का चुनाव, नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बीजेपी ने महिलाओं पर बड़ा दाव खेला था जिसमें 47 महिला उम्मीदवारों में 30 ने जीत हासिल की। दूसरी तरफ समाजवादी पार्टी और कांग्रेस ने क्रमशः 46 और 144 महिलाओं को टिकट दिया जिसमें 13 और 1 उम्मीदवारों को जीत हासिल हुई। लेकिन सवाल है, क्या अखिलेश यादव और राहुल गाँधी महिलाओं के साथ-साथ वाराणसी की जनता का विश्वास जीतेंगे।
वाराणसी में विधानसभा सीटों का चुनावी इतिहास
उत्तर प्रदेश की सबसे चर्चित लोकसभा सीट वाराणसी में 5 विधानसभायें आती है जिसमें रोहनियां जहां से अपनादल (सोनेलाल), के आलावा चारों सीटों वाराणसी उत्तर, वाराणसी दक्षिण, वाराणसी छावनी और सेवापुरी जिसमें 4-1 से बीजेपी का कब्ज़ा है ऐसा के लोगों के अनुसार, वाराणसी हिंदुत्व का प्रतीक के साथ प्रचार-प्रसार होता है इसलिये यहाँ की जनता बीजेपी, आरएसएस को पसंद करती है। लेकिन जिस तरह 2024 लोकसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार अजय राय का प्रदर्शन रहा उससे पूरी बीजेपी को हार का डर सताया हुआ है। वाराणसी की 5 विधानसभा सीटों में इंडिया गठबंधन 2-3 सीटों में विजयी हासिल करने की उम्मीद है।
रोहनियां विधानसभा (387)
यह सीट पटेल समुदाय का गढ़ माना जाता है इसलिए 2012 से वर्तमान तक सिर्फ उम्मीदवारों ने जीत हासिल की। पहला चुनाव वर्ष 2012 में हुआ, अपना दल की उम्मीदवार अनुप्रिया पटेल जीती। 2014 के उपचुनाव में समाजवादी पार्टी के नेता महेंद्र सिंह पटेल जीते। रोहनियां विधानसभा में एकतरफा जातिवाद है। ऐसा माना जाता है 2027 का विधानसभा चुनाव इंडिया गठबंधन की तरफ जाने की संभावना है, लोगों ने कहा इस बार राहुल गाँधी और अखिलेश यादव साथ लड़ते है तो बीजेपी की बहुत बुरी हार होने की संभावना है हालांकि जीत और हार का फैसला तो चुनावों के बाद पता चलेगा।
वाराणसी जिले में बीजेपी की सबसे सुरक्षित सीट छवानी विधानसभा (390) मानी जाती है |
उत्तर प्रदेश विधानसभा की सबसे चर्चित सीटों में से एक वाराणसी छवानी सीट है जहां पिछले 35 वर्षों से बीजेपी का एक तरफ़ा राज रहा। जिसमें ज्योत्स्ना श्रीवास्तव (1991, 1993), हरीश चन्द्र श्रीवास्तव (1996 2002), ज्योत्स्ना श्रीवास्तव (2007, 2012), तथा वर्तमान में सौरभ श्रीवास्तव (2017, 2022) ने जीत हासिल की।
1967 गठन के बाद पहला चुनाव जनसंघ के वर्मेश्वर पांडे ने जीता, उसके बाद पहली बार 1969 में कांग्रेस के लाल बहादुर सिंह ने जीत हासिल की। राजनीतिज्ञ के जानने वाले कहते है यह जनसंघ, बीजेपी की परंपरागत सीट मानी जाती है, यहां से इंडिया गठबंधन के जीतने की संभावना बहुत कम मानी जाती है।
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वाराणसी से इंडिया गठबंधन कितनी सीटें जीत सकता है?
यहाँ 5 विधानसभा सीटें आती है रोहनियां, वाराणसी उत्तर, वाराणसी दक्षिण, वाराणसी छावनी और सेवापुरी, जिसमें 4-1 से बीजेपी का कब्ज़ा है। पिछले 30 बर्षो का इतिहास देखें तो ज्यादातर सीटों पर बीजेपी का कब्ज़ा रहा है। 2024 के लोकसभा चुनाव में जब से इंडिया गठबंधन बना, और जीता उससे बीजेपी, आरआरएस और हिंदुत्ववादी संगठनों को हार का डर सना गया है। रिसर्च और यहाँ लोगों के अनुसार ” 2027 विधानसभा चुनाव में 3 महागठबंधन और 2 बीजेपी के पक्ष में जाने ज़ी संभावना है” |
2027 विधानसभा चुनाव में वाराणसी जिले का माहौल कैसा है?
जिस तरह से 2017, 2022 के विधानसभा चुनावों में बीजेपी ने एकतरफा जीत हासिल थी, उसको देखते हुये 2027 का उत्तर प्रदेश विधानसभा अलग होने की संभावना है। 2017 मोदीयुग कहा जाता है लेकिन धीरे-धीरे उनकी लोकप्रियता में बदलाव, लोगों का कम भरोषा जिससे 2024 लोकसभा चुनाव हारते -हारते जीत हासिल की। वाराणसी की जनता बदलाव चाहती है इसलिए वर्तमान चुनाव में बीजेपी मात्र 2 सीटें जीत सकती है। हालांकि यह रिसर्च और लोगों के बयानों पर आधारित रिपोर्ट है।
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