बिहार के दंगल में एक तरफ नरेंद्र मोदी, नीतीश कुमार, चिराग पासवान और उपेंद्र कुशवाहा जैसे नेता नेतृत्व कर रहे है वहीं दूसरी तरफ तेजस्वी यादव, राहुल गाँधी, सीपीआई और सीपीआईएम का नेतृत्व है। जिस प्रकार से 2025 जनवरी से वर्तमान NDA गठबंधन की रैलियों को देखें, दूसरी तरफ महागठबंधन की रैलियों और सभाओं को देखने से साफ पता चलता है यह चुनाव महागठबंधन के पक्ष में जाता दिख रहा है। अररिया जिले में 6 विधानसभाययें आती है जिसमें NDA गठबंधन (3 बीजेपी, 1 जदयू ) महागठबंधन (1 कांग्रेस) और 1 सीट AIMIM को मिली थी |
अररिया जिले की नरपतगंज (Narpatganj) 46/ विधानसभा का राजनैतिक समीकरण, जिसमें महागठबंधन आगे है |
पहला चुनाव 1962 में हुआ जिसमें कांग्रेसी नेता डुमार लाल बैथा (Dumar Lal Baitha) ने जीत हासिल करने के बाद 1967, 1969,1972 में फिर लगातार कांग्रेस के नेता सत्य नरायण यादव (Satya Narayn yadav) ने जीत हासिल की। 1962 से 2025 तक, बीजेपी ने 5 बार (1980,2000,2005,2010 2020) जीत हासिल की। 2020 चुनाव में नरपतगंज विधानसभा से जय प्रकाश यादव (98397) ने राजद उम्मीदवार अनिल यादव (69787) को 28610 मतों से हराया था महागठबंधन के नेताओं की सोच आदिवासी, पिछड़े, दलित लोगों का ध्यान आकर्षित करने की तरफ है। लेकिन यह सीट NDA के खाते में जाती दिख रही है।
47-रानीगंज (Raniganj) /SC/47 विधानसभा का चुनावी समीकरण
पहला चुनाव 1952 में हुआ जिसमें कांग्रेस नेता राम नरायण मंडल ने जीत हासिल की, हालांकिअगले विधानसभा चुनाव (1962) में स्वतंत्र पार्टी के उम्मीदवार गणेश लाल वर्मा, लेकिन 2015, 2020 से जदयू उम्मीदवार अचिमित ऋषिदेव जीतते आ रहे है। ऐसा माना जाता, रानीगंज (Raniganj) में सिर्फ NDA में मतदाता है इसलिये वर्ष 2000 से 2025 तक सिर्फ NDA उम्मीदवार ही जीत रहे है। हालांकि वर्तमान चुनाव में यहां का परिपेक्ष महागठबंधन की तरफ जाने को दिखाई दे रहा है। 2020 विधानसभा चुनाव में राजद उम्मीदवार अविनाश मंगलम को मात्र 2304 मतों से हार मिली थी।
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48-फारबिसगंज (FarbesGanj)/ विधानसभा का चुनावी समीकरण
एक दौर था जब फारबिसगंज विधानसभा कांग्रेस का गढ़ माना जाता था लेकिन जब से 7 बार के विधायक सरयू मिश्रा गये तब से 2025 तक कांग्रेस नहीं जीत सकी, उन्होंने (1967, 1979, 1972, 1977, 1980, 1985 एक तरफ़ा जीत हासिल की, लेकिन पिछले 8 विधानसभा चुनावों में (1990, 1995, 2000, 2005, 2005, 2010, 2015, 2020) में बीजेपी मात्र वर्ष 2000 का विधानसभा चुनाव बहुजन समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार जाकिर हुसैन खान से हारी। इसलिये 2025 फारबिसगंज का चुनाव महागठबंधन के लिए इतिहास रचने के बराबर होगा।
49-अररिया (Araria)/ विधानसभा का चुनावी समीकरण
कांग्रेस पार्टी का गढ़ मानी अररिया जिले की अररिया (Araria)/ विधानसभा सीट है 1952 विधानसभा चुनाव के बाद, सबसे ज्यादा 7 बार कांग्रेस को जीत मिली। ऐसा माना जाता है यहां महागठबंधन की अच्छी पकड़ है 2020 के चुनाव में कांग्रेस के आबिदुर रहमान ने जदयू उम्मीदवार शगुफ्ता अमीन को 47936 वोटों से हराया इसलिये लोगों का मानना है महागठबंधन फिर से जीत हासिल करने में सक्षम होगा।
50-जोकीहाट (Jokihat)/ विधानसभा का चुनावी समीकरण
यह ऐसी विधानसभा सीट जोकि AIMIM के खाते में गयी और राजद उम्मीदवार सरफराज आलम 7383 मतों से चुनाव हार गए। जदयू नेता के तौर पर सरफराज आलम की पहचान रही है, लोगों का मानना था राजद से चुनाव जीतने के बाद जदयू में जाने की संभावना है इसलिये मतदाताओं ने पसंद नहीं किया। जोकीहाट विधानसभा में ज्यादातर अल्पसंख्यक, पिछले और वंचित समाज के लोग रहते है इसलिये महागठबंधन को किसी अच्छे नेता को टिकट देना चाहिए।
51-सिकटी (Sikti)/ विधानसभा का चुनावी समीकरण
अररिया जिले की सिकटी विधानसभा में सबसे ज्यादा स्वतन्त्र राजनीति दल के उम्मीदवार ने जीत हासिल की। पिछले 3 चुनावों में बीजेपी के उम्मीदवार जीतते आ रहे है लेकिन 2025 का विधानसभा चुनाव महागठबंधन के पक्ष में जाता दिख रहा है हालांकि जब से चिराग पासवान ने लोकसभा चुनाव में जीत हासिल की तब से NDA गठबंधन में अधिक मजबूत दिखाई दे रहा है।
FAQ
जिस प्रकार से अररिया जिले के लोगों ने बताया उससे लगता है रानीगंज (Raniganj) में NDA का माहौल अच्छा है बाकी चारों विधानसभाओं जोकीहाट (Jokihat), सिकटी (Sikti),अररिया (Araria) नरपतगंज (Narpatganj), रानीगंज (Raniganj) में महागठबंधन के जीतने के आसार हैं। हालांकि यह विश्लेषण, लोगों से बातचीत और रिसर्च पर आधारित है।
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