बिहार चुनाव : बांका में महागठबंधन 4 सीटें जीत सकता है देखिए पूरी रिपोर्ट।
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बिहार चुनाव : बांका में महागठबंधन 4 सीटें जीत सकता है देखिए पूरी रिपोर्ट।

by रवि पाल
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भारतीय जनता पार्टी राजधानी दिल्ली विधानसभा चुनाव जीत के बाद बिहार में 150 सीटें जीतने तथा सरकार बनाने का दावा कर रही है लेकिन जमीनी हकीकत बिलकुल अलग है। जिस तरह से पिछले 6 महीनों में कांग्रेस अध्यक्ष मलिकार्जुन खड़गे, राहुल गाँधी की रैलियों, सभाओं में युवाओं की भीड़, जोश दिखाई दे रहा है उससे लगता है, वर्तमान चुनाव नरेंद्र मोदी और नीतीश कुमार के लिए आखिरी सावित हो सकता है। बांका लोकसभा के अंतर्गत 5 विधानसभायें आती है 2020 चुनाव में राजग (NDA) को 4 महागठबंधन को 1 सीट पर जीत हासिल हुई थी।

अमरपुर विधानसभा (159) में महागठबंधन का माहौल

बांका जिले की अमरपुर विधानसभा में वर्तमान जदयू विधायक जयंत राज कुशवाहा जिन्होंने कांग्रेस उमीदवार जितेंद्र सिंह को 3242 मतों से हराया। हालांकि ऐसा माना जाता था यदि महागठबंधन से राजद उम्मीदवार को टिकट दिया जाता तो जदयू की हार संभव थी क्योंकि 1957 से वर्तमान तक कांग्रेस मात्र 4 बार ही चुनाव जीती। पहली बार (1957, 1962) और दूसरी बार (1980, 1995), इसलिए महागठबंधन उम्मीदवार को कांग्रेस से टिकट महंगा पड़ा। हालांकि जिस प्रकार दलित, बहुसंख्यक, पिछड़े समाज के लोगों का वोट कांग्रेस को मिलना चाहिए था उसमे NDA गठबंधन सेंध लगाने में कामयाब रहा। इस तरह से महागठबंधन के उम्मीदवार को हार का सामना करना पड़ा।

वर्तमान के चुनाव परिपेक्ष को देखते हुये यह सीट महागठबंधन के खाते में जाती दिख रही है। एक तरफ राहुल गाँधी और तेजस्वी यादव की बढ़ती लोकप्रियता, दूसरी तरफ युवाओं के दिमाग़ में बदलाव, इसलिए अमरपुर विधानसभा में महागठबंधन बहुत आगे दिख रहा है।

धोरौया विधानसभा (SC)/160 में महागठबंधन की हो सकती है हार

एक दौर था जब धोरैया में सीपीआई (CPI) के नरेस दास किंग की भूमिका निभाते थे हालांकि 5 बार चुनाव (1972, 1977, 1980, 1990, 1995) जीतने के समता पार्टी के नेता भूदेव चौधरी ने 2000 के चुनाव में हराकर राजनीति को समाप्त कर दिया। हालांकि भूदेव चौधरी ने समता पार्टी छोड़ राजद से जुड़ गये और वर्तमान में विधायक हैं। लेकिन जिस तरह से उनका कार्यकाल रहा जिससे यहां की जनता बदलाव का मन बना चुकी है।

महागठबंधन के लिए धोरौया विधानसभा की सीट बचा पाना मुश्किल है, यहां के लोगों का मानना जदयू नेता मनीष कुमार इनसे कई गुना बेहतर हैं जोकि पिछले चुनाव में कुछ मतों के अंतर से हार गये थे। यदि महागठबंधन भूदेव चौधरी को टिकट देती है या टिकट कटती है, हार संभव क्योंकि उसके पास कोई बड़ा नेता नहीं हैं इसलिये महागठबंधन यह सीट हार सकता है।

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बांका विधानसभा (161) में महागठबंधन  की अच्छी पकड़

NDA के लिए सबसे सुरक्षित बांका विधानसभा सीट मानी जाती है पहला चुनाव 1952 में हुआ था तब से लेकर वर्तमान (1992-2025) तक बीजेपी 7 बार विजयी हो चुकी है हाल ही में 6 बार के विधायक राम नरायण मंडल (1990, 2000, 2005,2014,2015 2020) सत्ता में है लेकिन क्या NDA अपनी जीत को जारी रख सकेगा या नहीं। झारखण्ड के गोड्डा जिले से सीमा साझा करने वाली विधानसभा में बीजेपी हिंदुत्व के भरोसे जीतती आ रही है। लेकिन जिस तरह से महागठबंधन और राजग के नेताओं ने दलित, पिछड़े, आदिवासियों को लुभाने तरीका अपनाया है उससे बदलाव दिख रहा है।

बांका विधानसभा में महागठबंधन के पास कोई अच्छा नेता न होने के कारण NDA को फायदा जरूर हुआ लेकिन वर्तमान विधानसभा चुनाव में महागठबंधन की पकड़ मजबूत दिख रही है इसलिये NDA चुनाव हारने के कगार पर है।

कटोरिया विधानसभा (ST)/ 162 का चुनावी समीकरण

बांका जिले की कटोरिया विधानसभा ST रिजर्व सीट है 2020 चुनाव में बीजेपी महिला उम्मीदवार निक्की हेंब्रम ने राजद की स्वीटी हेंब्रम को 6704 मतों से हराया। ऐसा माना जाता था यहां बीजेपी की जीत संभव नहीं है क्योंकि (1952 से 2025) मात्र 2 बार जीत हासिल की। पहला चुनाव 2010, और दूसरा चुनाव 2020 में, इससे लगता है महागठबंधन की खराब रणनीति के कारण NDA जीता। 

हालांकि 2025 के विधानसभा चुनाव में महागठबंधन की आदिवासी और दलित वोट बैंक को वापस लाने की क़वायद हो रही है। बीजेपी के लिए फिर से कटोरिया विधानसभा आसान नहीं है इसलिये यह सीट महागठबंधन के खाते में जाती दिख रही है।

बेल्हार विधानसभा (163) में कांटे की टक्कर हो सकती है

यह ऐसी विधानसभा है जहाँ (1962 -2025) बीजेपी कभी नहीं जीती, पिछले 35 वर्षों से राजद और जदयू जीतते आ रहे हैं, 2020 विधानसभा चुनाव में जदयू नेता मनोज यादव ने राजद उम्मीदवार रामदेव यादव को 2713 मतों से हराया था। चुनाव से पहले कयास लगाये जा रहे थे, महागठबंधन से रामदेव यादव की जीत लगभग तय है।

FAQ

बांका जिले से महागठबंधन कितने सीटों पर जीत सकता हैं?

चुनाव विश्लेषण के अनुसार, बांका जिले में महागठबंधन की पकड़ मजबूत दिख रही हैं,धोरौया विधानसभा (SC)/160, को छोडकर,अमरपुर विधानसभा (159, बांका विधानसभा (161),कटोरिया विधानसभा (ST)/ 162, बेल्हार विधानसभा (163) में महागठबंधन की पकड़ बहुत मजबूत दिख रही है।

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