यदि हम अख़बार की बात करते है तो हमें सबसे पहले एक मशहूर शायर की बातें याद आ जाती है वो अक्सर कहा करते थे “ खीचों न कमानों को न तलवार निकालो, जब तोप मुकाबिल हो तो अखबार निकालो “ ये लाइने मशहूर शायर अकबर इलाहबादी ने कही थी बंगाल गजट सप्ताहिक पत्रिका पर ये लाइने बिलकुल सही बैठती है |
जिस तरह से आज के दौर में समाचार पत्र और अख़बार काम कर रहे है उसी तरह से एक जमाने में कंपनी के शासन में भी समाचार पत्र काम किया करते थे जिस तरह से बड़ती समाचार पत्रों की गुलामी , करप्सन में लिप्त पत्रकारिता को देखते है तो उस समय के समाचार पत्र के नायक कहे जाने बाले “बंगाल गजट नामक एक सप्ताहिक पत्रिका” के सम्पादक जेम्स आंगस्टक हिक्की याद आ जाते है, जिन्होंने आपनी बात रखने के लिए कंपनी (ईस्ट इण्डिया कंपनी ) को भी नहं छोड़ा था |
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बंगाल गजट के कुछ और नाम :-
29 जनवरी 1780 को हिंदुस्तान का पहला समाचार पत्र प्रकाशित हुआ इसे Hickey’s Gazette, Bengal Gazette, James Augustus Hickey या Calcutta General Advertiser के नामों से भी जाना जाता है |
इस अख़बार का उद्देश्य सभी के लिए खुला लेकिन किसी से प्रभावित नहीं, के विचारों के साथ कम किया करता था इसको हम यूँ समझें , न किसी के दवाव में , ना किसी से डरकर और न ही किसी और से विचार लेना, इस समाचार पत्र की महानता को दर्शाता है, दूसरे शब्दों में इसका मतलब ‘सभी पार्टियों के लिए खुला लेकिन किसी से प्रभावित नहीं’ था|
जेम्स आंगस्टक हिक्की के बारे में अमेरिका के पत्रकार ने सराहना करते हुए लिखा:-
हिक्की ने कलकत्ता के तत्कालीन गवर्नर जनरल वारेन हेस्टिंग्स की कड़ी आलोचना की और ब्रिटिस सरकार में जो भ्रस्टाचार के मामले आये उनको प्रमुखता से उठाया, यह दिखा कि यह समाचार पत्र किसी के दवाव में आकर काम नहीं करते| हिक्की ने दिखा दिया था कि पत्रकारिता कैसे की जाती है और कैसे की जानी चाहिए
बंगाल गजट प्रकाशन:-
भारत की तात्कालिक राजधानी कलकत्ता से प्रकाशित यह अंग्रेजी भाषा का साप्ताहिक अख़बार शनिवार को प्रकाशित होता था इसकी सबसे प्रमुख पंक्ति में लिखा होता था ‘सभी के लिए खुला लेकिन किसी के विचार नहीं ‘
जेम्स आंगस्टक हिक्की ने ऐसी पत्रकारिता की जो आज के पत्रकारों में भी उर्जा का संचार किया करती है इन्होने न केवल जो ब्रिटिश सिपाही थे उनको प्रभावित किया बल्कि भारतियों को भी प्रभावित किया आये दिन यह अख़बार भ्रष्टाचार के मुद्दे उजागर किया करता था |
जिस तरह से अंग्रेज अधिकारीयों के खिलाफ लिखने में हर किसी की हिम्मत नहीं हुआ करती थी उस बात को हिक्की आसानी से लिख दिया करते, इसीलिए इनको जेल भी जाना पड़ा लेकिन इन्होने जेल से अपना अखबार छापना जारी रखा।
बंगाल गजट प्रकाशन बंद:-
जब यह समाचार पत्र प्रकाशित हो रहा था तब इसके सम्पादक हिक्की किसी कुछ भी प्रकाशित करने से डरते नहीं थे जब यह समाचार प्रकाशित हो रहा था उस समय कलकत्ता के गवर्नर जनरल हेस्टिंग्स के बारे में भी इस समाचार में प्रकाशित हो गया क्योंकि इस समाचार पत्र ने हेस्टिंग्स पर भ्रस्टाचार के आरोप लगाये थे इसीलिए इन्होने एक कानून बनाते हुए अभिव्र्यक्ति की स्वतंत्रा के अधिकार का हवाला देकर इस समाचार पत्र को प्रकाशित होने पर रोक लगा दी|
30 मार्च 1782 को हिक्की के बंगाल गजट का प्रकाशन बंद हो गया, जब इसके प्रकारों(प्रिंटिंग मशीन,जरूरी सामान) को सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश द्वारा जब्त कर लिया गया और यह समाचार 2 वर्षों में बंद हो गया |
FAQ
भरत देश में सबस पहले प्रेस की स्थापना 1550 में पुर्तगालियों ने की थी
कलकाता गजट समाचार पत्र कब और किसने शुरू किया ?
Officer Francis Gladwin ने इसकी शुरुआत 1784 में कलकत्ता से थी
1557 में गोवा के इसाई पादरियों ने प्रथम पुस्तक प्रकाशित की थी जिनका नाम St Francis Xavier’s है यह एक धार्मिक पुस्तक हुआ करती थी
29 जनवरी 1780 को हिंदुस्तान का पहला समाचार पत्र प्रकाशित हुआ
30 मार्च 1782 को हिक्की के बंगाल गजट का प्रकाशन बंद हो गया,
29 जनवरी 1780 को हिंदुस्तान का पहला समाचार पत्र प्रकाशित यह साप्ताहिक अंग्रेजी समाचार पत्र, चार पृष्ठ, प्रत्येक शनिवारको प्रकाशित होता था इसके सम्पादक जेम्स आंगस्टक हिक्की थे
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