इस विधानसभा सीट पर वर्तमान तक जदयू, राजद नहीं जीते इसलिये बिहार की सबसे हॉट सीटों में एक माना जाती है। भागलपुर विधानसभा का पहला चुनाव 1952 में हुआ जिसने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) के सत्येन्द्र नरायण अग्रवाल (satendra Narain Agrawal) ने लगातार तीन बार ( 1952,1957,1962) विजय हासिल की।
भागलपुर विधानसभा का पहला चुनाव (1951)
1951 में पहला चुनाव हुआ था उस समय भागलपुर विधानसभा का नाम भागलपुर टाउन (Bhagalpur Town, ) संख्या 183 थी। कुल मतदाता 50797 थे लेकिन चुनाव के दौरान 22490 मतदाताओं ने मतदान किया। अखिल भारतीय कांग्रेस के सत्येंद्र नरायण अग्रवाल (Satyendra narayan Agrawal) ने BJS के उम्मीदवार गौरी शंकर प्रसाद (Gauri Sankar Prasad) को 7446 मतों से हराया।
- सतेंद्र नरायण अग्रवाल को 10461 वोट मिले थे।
- गौरी शंकर प्रसाद को मात्र 3015 वोट मिले थे।
भागलपुर विधानसभा का दूसरा चुनाव (1957)
दूसरा चुनाव 1957 में हुआ था इस चुनाव में भी अखिल भारतीय कांग्रेस के सत्येंद्र नरायण अग्रवाल (Satyendra narayan Agrawal) ने जीत हासिल की, चुनाव से पहले कुछ मतों की संख्या 55846 थी लेकिन वोटिंग के दौरान मात्र 22555 लोगों ने अपने मत का उपयोग किया। 4082 मतों से कांग्रेस ने जीत हासिल की।
भागलपुर विधानसभा का तीसरा चुनाव (1962)
- इस चुनाव में भी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सत्येंद्र नरायण सिंह ने 9030 वोटों से जीत हासिल की। हालांकि उसके बाद से लगातर 4 विधानसभा चुनाव जनसंघ (1967, 1969, 1972, 1977) ने जीते।
- 1980 कांग्रेस ने फिर वापसी की लेकिन ज्यादा वर्षों तक जीत जारी नहीं रखा सकी। वर्तमान में काँग्रेस के अजीत शर्मा (2014,2015,2020) विधायक हैं लेकिन 2025 का चुनाव कांग्रेस और महागठबंधन के लिए चुनौतीपूर्ण रहेगा।
चुनावी सर्वें :-
इस दौरान लोगों ने बताया अजीत शर्मा अच्छे नेता हैं लेकिन नरेंद्र मोदी को जितना चाहते हैं, कुछ लोगों का मानना है बीजेपी जीतेगी तो हिन्दुओं का विकास होगा। कुछ बिहारवासियों का ऐसा भी मानना है, महागठबंधन सिर्फ मुस्लिमों का समर्थन करता है।

मतदाताओं की राय:-
सवाल बहुत हैं जिसमें लोगों ने कहा कि नीतीश कुमार को वोट डालना मज़बूरी है क्योंकि चाहते हुये भी बीजेपी का मुख्यमंत्री नहीं बन सकता है। कुछ मतदाताओं ने साफ कहा, राजद और कांग्रेस का महागठबंधन हिन्दू विरोधी है इसलिये NDA को वोट देते हैं।आगे मतदाताओं का मानना है बिहार में बदलाव हो, नीतीश की जगह किसी और युवा चेहरा को मुख्यमंत्री बनाया जाये ताकि बिहार में विकास हो सके।
निष्कर्ष :-
बिहार चुनाव, देश और दुनियां के लिए महत्वपूर्ण चुनाव है, एक तरफ नरेंद्र मोदी और बिहार बीजेपी इकाई के नेता चाहते है नीतीश की राजनीति खत्म करके बीजेपी का मुख्यमंत्री बनाया जाये, वहीं दूसरी तरफ कुछ लोगों का मानना है बीजेपी को नीतीश का साथ छोड़कर चिराग पासवान को मुख्यमंत्री का चेहरा बनाना चाहिए।
भागलपुर में जिस तरह लोगों की राय है, महागठबंधन का जीतना आसान नहीं होगा, लोगों का कहना है अजीत शर्मा को 3 बार विधायक बनाकर देख लिया इसबार परिवर्तन होना चाहिए। लेकिन जिस तरह से बिहार में राहुल गाँधी रैलियां, जनसभायें कर रहे है उससे लगता है इस चुनाव में मतदाताओं का वोट बड़े चेहरों के ऊपर हो सकता है।
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FAQ
हाँ बिलकुल, जिस तरह कांग्रेस के वर्तमान विधायक अजीत शर्मा (2014,2015 2020) का कार्यकाल रहा है उसके भागलपुर की जनता ख़ुश नहीं है इसलिये बदलाव चाहते है।
2025 विधानसभा चुनाव में, भागलपुर जिले से महागठबंधन आगे हैं। 6 विधानसभाओं (कहलगांव,पीरपेंती, भागलपुर, नाथनगर, गोपालपुर और बिहपुर) हैं जिसमें 4-2 से महागठबंधन आगे आ सकती है। हालांकि यह सिर्फ आंकड़ों के अनुसार बताया है। कृपया इनको सत्य ना मानें।
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