भारत के इतिहास में ऐसे बहुत कम विचारक हुए जिनका जन्मतो आजादी से पहले हुआ हो और उनकी मृत्यु आजादी के बाद और उन्होंने भारत के इतिहास में हजारों पन्ने अपने नाम लिखवाये हों, यह लेख ऐसे ही महान समाज सुधारक, इतिहासकार, आर्थिक नीति के ज्ञाता रजनी कोठारी के बारे में है, यहाँ उनके द्वारा किये गये प्रमुख कार्य तथा रचनाओं का वर्णन करेगे |
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रजनी कोठारी की उपलब्धियां :-
- प्रारम्भ में 2 वर्ष स्याजी राओ गायकवाड़ विश्वविद्यालय में प्रोफेसर रहे।
- रजनी कोठारी समाजशास्त्री श्यामा चरण दुबे के प्रोत्साहन पर ‘राष्ट्रीय सामुदायिक विकास संस्थान (NCDI) से जुड़ गये। उन्होंने अपने फ़ील्ड वर्क के दौरान पूरे देश का दौरा किया।
- CSDS – सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ डेवलपिंग सोसाइटी 1963 (दिल्ली)
- 1974 गुजरात नव निर्माण आंदोलन से जुड़े और उसका मार्ग प्रशस्त किया।
- लोकायन संस्था 1980- बुद्धिजीवी लोगों के विचारों के लिए मंच
- PUCL- People’s Union Civil Liberties के अध्यक्ष रहे। 1980s
- 1984 रिपोर्ट (Who are the guilty) तथा योजना आयोग के सदस्य भी रहे। 1990s
- नव सामाजिक आंदोलन के समर्थक (Non-Party Political Formations) के भी रहे |
रजनी कोठारी की प्रमुख रचनाएँ:-
‘इकॉनॉमिक वीकली’ के छह अंकों में उनकी एक शोधपत्रो की शृंखला छपी, जिसका शीर्षक था ‘भारतीय राजनीति का रूप और सार ।
- Politics in India- (1970)
- Political economy of development-(1971).
- Footsteps Into the Future: Diagnosis of the Present World and a Design for an Alternative- (1975).
- State and nation building-(1976).
- Democracy and the Representative System in India- (1976).
- Democratic Polity and Social Change in India Crisised Opportunities-(1976).
- Towards a Just World-(1980).
- State against democracy: in search of humane governance
रजनी कोठारी की प्रमुख संस्थाएं:-
CSDS – इन्होंने वर्ष 1963 में ‘सी.एस.डी.एस.’ (विकासशील समाज अध्ययन पीठ, Centre for the Study of Developing Societies) की स्थापना की थी। यह दिल्ली स्थित समाज विज्ञान तथा मानविकी से सम्बंधित अनुसंधान संस्थान है। यह संस्था वर्तमान में सेफोलोजी के लिए प्रमुख संस्था मानी जाती है।
लोकायन ‘लोकायन’ नामक संस्थान की स्थापना रजनी कोठारी द्वारा वर्ष 1980 में की गई थी। कोठारी जी ने दलित- पिछड़ों की राजनीति को सूत्रबद्ध करने, समाज में हो रहे आमूल परिवर्तनों पर पर रोक लगाने और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भूमण्डलीकरण की ताक़तों के ख़िलाफ़ बौद्धिक नाकेबंदी करने के लिए किया। 1985 में इस संस्था को Right Livelyhood award से सम्मानित किया गया था।
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FAQ
वर्ष 1989 में यह रचना रजनी कोठारी के द्वारा लिखी गयी थी |
