वर्तमान में जिस तरफ हमारा समाज जा रहा वह एक तकलीफ देह भी है और सही दिशा भी, एक दौर था जब महिलाओं को बाहर काम करने के लिए जाने नहीं दिया जाता था लेकिन धीरे- धीरे समाज में बदलाव आता गया और वर्तमान में महिलाएं भी पुरुषों की तरह कदम से कदम मिलाकर चल रही है उसी तरह आज का यह लेख समलैंगिक विवाह पर निर्धारित है |
इस लेख में समझेंगे कि यह कितना सही है और कितना गलत है, इसके सकारात्मक और नकारात्मक परिणाम क्या है? इसके साथ- साथ यह भी जानने की कोशिस करेंगे कि वर्तमान में भारतीय समाज ऐसे विवाह के बारे में क्या सोचता है |
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समलैंगिक विवाह क्या होता है:-
यह एक तरह का ऐसा रिलेशनशिप है जो समान लिंग के व्यक्तियों के मध्य वैवाहिक गठवंधन होता है, इस तरह का विवाह दो पुरुषों के बीच में होता है या फिर दो महिलाओं के बीच में हो सकता है इस तरह के विवाह को समलैंगिक विवाह कहते है|
भारत देश में IPC की धारा 377 के अनुसार, समलैंगिक विवाह एक अपराध है इस प्रावधान को माननीय सुप्रीमकोर्ट ने 2018 में रद्द कर दिया और कहा-
“लैंगिक सम्बन्ध स्थापित करना भारतीय संविधान के आर्टिकल 21 के तहत गरिमामय जीवन के अधिकार के तहत आता है क्यों कि यह हर मनुष्य का संविधानिक अधिकार है कि वह किस इन्सान के साथ अपने लैंगिक संबंध बनाना चाहता है”
इसके बाद से भारत देश में समलैंगिक संबंधों का क़ानूनी विरोध समाप्त हो गया, मतलब अब इस देश में समलैंगिक संबंध स्थापित करने पर उनके खिलाफ कोई क़ानूनी कार्यवाही नहीं हो सकती इस तरह से IPC की धारा 377 को खत्म कर दिया गया|
समलैंगिक विवाह का इतिहास क्या है:-
यदि समलैंगिक विवाह के बारे में रिसर्च करते है तो पता चलता है दुनियां के 34-36 देशों ने इस तरह के रिलेशनशिप बनाने/ रहने की मान्यता है|
- पहली बार वर्ष1970 में मिनीपोलिस यूएस में एक पुरुष जोड़े ने विवाह लाइसेंस के लिए आवेदन किया था|
- नीदरलैंड यूरोप का पहला देश बना जहाँ 2001 में समलैंगिक विवाह को मान्यता मिली थी|
- वर्ष 2013, रूस में 18 साल से उम्र में समलैंगिक संबंध बनाने पर पाबंधी लगाई गयी लेकिन यदि पुरुष की उम्र 18 साल से उपर है तो ऐसे पुरुषों को समलैंगिक संबंध बनाने पर कोई रोक नहीं होगी|
- ताइवान पहला एशियाई क्षेत्र जहाँ 2019 में समलैंगिक विवाह को मान्यता मिली|
- वर्ष 2018, भारत में वयस्क लोगों के बीच समलैंगिक विवाह/ समलैंगिक संबंध अपराध नहीं|
- नेपाल ने कुछ दिन पहले समलैंगिक विवाह को स्वीकृति दी है यह एशिया का एक ऐसा देश बन गया है जिसने समलैंगिक विवाह पर स्वीकृति है|
- आपके लिए यह जानना बहुत जरूरी हो जायेगा यदि भारत देश में समलैंगिक विवाह पर स्वीकृति मिलती है तो यह एशिया का दूसरा ऐसा देश हो जायेगा जहाँ मनुष्य समलैंगिक विवाह कर सकेंगे|
समलैंगिक विवाह के संबंध में सुप्रीम कोर्ट की धारणा:-
सुप्रीम कोर्ट में 5 जजों की संविधान पीठ द्वारा समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता देने संबंधी जनहित याचकाओं की सुनवाई|
केंद्र सरकार का मत :- यधपि समलैंगिकता अब अपराध की श्रेणी में नहीं है किन्तु इसके बाबजूद समलैंगिक विवाह को मान्यता नहीं दी जा सकती |
वर्ष 2018 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा ऐतिहासिक निर्णय :- IPC की धारा 377 के तहत समलैंगिकता अपराध के दायरे से बहार दो वयस्कों के बीच परस्पर सहमति से समलैंगिक यौन संबंध अपराध नहीं है|
समलैंगिक विवाह के संबंध में केंद्र सरकार का तर्क :-
भारत में विवाह को तभी मान्यता दी जा सकती है जब विवाहित दंपति बच्चा पैदा करने में सक्षम हो|
सुप्रीम कोर्ट द्वारा समलैंगिकता को क़ानूनी मान्यता, समलैंगिक विवाह को अनुमति देने के उद्देश्य से नहीं बल्कि समलैंगिकता को केवल दंडनीय अपराध की श्रेणी से बहार करने के उद्देश्य से |
समलैंगिक विवाह को क़ानूनी मान्यता देने से समाज और भारतीय संस्कृति पर नकारात्मक प्रभाव |
“विवाह” नामक संस्था का वास्तविक उद्देश्य समाप्त |
विपक्ष के तर्क :-
यह आवश्यक नहीं कि विवाह केवल वंश परम्परा को ही आगे बढ़ाने के उद्देश्य से किया गया अथवा विवाह के बाद अनिवार्य रूप से बच्चे पैदा किये जाये |
समलैंगिकता को अपराध की श्रेणी से बहार :- अतः समलैंगिक विवाह को अनुमति दी जानी चाहिए |
भारत देश में विवाह परम्परा अत्यंत प्राचीन और वर्तमान वैज्ञानिक युग में समलैंगिक विवाह जैसे नवीन आयाम भी इसमें जोड़े जा सकते है |
अनुच्छेद 21:- अपनी पसंद से विवाह करने का अधिकार
विश्व में लगभग 36 देशों ने समलैंगिक विवाह को अनुमति दी |
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FAQ
अनुच्छेद 21:- अपनी पसंद से विवाह करने का अधिकार
विश्व में लगभग 36 देशों ने समलैंगिक विवाह को अनुमति दी
वर्ष 2018, सुप्रीमकोर्ट के अनुसार- भारत में वयस्क लोगों के बीच समलैंगिक विवाह/ समलैंगिक संबंध अपराध नहीं
वर्ष1970 में मिनीपोलिस यूएस में एक पुरुष जोड़े ने विवाह लाइसेंस के लिए आवेदन किया था|
