जैनुलआबदीन को कश्मीर का अकबर एवं अलाउद्दीन खिली कहा जाता है इसने अपने राज्य में उद्योगों के विकास के लिए विदेशी कारीगर मंगवाए तथा इसने भूमि की माप करवाई और बाजार में वस्तुओं के मूल्य निर्धारित किये, नगरों का निर्माण करवाया | इस लेख में कश्मीर तथा कश्मीर का इतिहास और इस साम्राज्य के शासक जैनुलआबदीन (History of Kashmir Empire) का इतिहास तथा किये गये कार्यों पर प्रकाश डालेंगे |
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जैनुलआबदीन का कश्मीर पर संक्षिप्त इतिहास :-
यह धार्मिक दृष्टि से उदार शासक था, इसने जजिया कर की समाप्ति की और वह ऐसा करने वाला पहला शासक था, इसने हिन्दुओं की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए उन्हें सती प्रथा की अनुमति दी और इसके काल में जोनराज नामक विद्वान ने द्वतीय राजतरंगीणी की रचना की |
महत्वपूर्ण तथ्य :-
- कश्मीर में 1286 ई. में सिंहदेव ने एक हिंदू राजवंश स्थापित कर दिया |
- 1301 ई. में, इसका भाई सोहेल गद्दी पर बैठा जिसके शासनकाल में 1320 ई. में दलूचा के नेतृत्व में यहां पर मंगोल आक्रमण हुआ जिसने 8 महीनों तक भारी लूटपाट की |
- रिंचन ने 1320-23 ई. तक कश्मीर पर शासन किया और हिंदू धर्म स्वीकार किया |
- 1339 ई. में, शासक उदयनदेव की मृत्यु के पश्चात् उसके मंत्री शमसुद्दीन शाहमीर ने सिंहासन पर कब्जा कर लिया तथा कश्मीर का प्रथम मुस्लिम शासक बना |
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FAQ
शमसुद्दीन शाहमीर जोकि 1339 ई. में, शासक उदयनदेव की मृत्यु के पश्चात् उनके शासन पर कब्ज़ा कर के शासक बना था |
1- दुर्लभबरद्धन नामक व्यक्ति ने सातवीं शताब्दी में कर्कोट की नीच डाली|
2- ललितादित्य मुक्तापीड (724-760 ई.) इस वंश का सबसे शक्तिशाली शासक था यह भगवान सूर्य को समर्पित प्रसिद्ध मार्तण्ड मंदिर इसी ने बनवाया था तथा इसके साथ-साथ कश्मीर में परिहासपुर नामक नगर बसाया था |
1- कर्कोट वंश के बाद उत्पल वंश सत्ता में आया, सिकी स्थापना अवन्ति वर्मन (855 -883 ई.) ने की, इसके एक मंत्री जिनका नाम सुय्य था उसी ने यहाँ नहरों का निर्माण करवाया और अवन्तिपुर नामक नगर की स्थापना की |
क्षेमेन्द्र गुप्त 950 ई. में गद्दी पर बैठा, इसका विवाह लोहार वंश की राजकुमारी दिद्दा से हुआ, दिद्दा एक महत्वाकांक्षी महिला थी और अगले पचास वषों तक सत्ता व्यावहारिक रूप से उसी के हाथ में रही |
संग्राम राज (1003 -28) लोहार वंश का संस्थापक था|
हर्ष लोहार वंश का शासक था जिसे काश्मीर का नीरो कहा जाता था |
ललितादित्य मुक्तापीड (724-760 ई.) ने इस मंदिर का निर्माण कराया था |
ललितादित्य मुक्तापीड (724-760 ई.) ने परिहासपुर नामक नगर बसाया था |
