यह एक ऐसी गुफा हैं (Kanchangarh Cave) जहाँ पर आज भी भगवान शिव, माता पार्वती विराजमान है लेकिन अंदर दर्शन के लिए हजारों साँपो से रास्ते गुजरना पड़ता है। झारखण्ड प्रदेश के पाकुड़ जिले के लिट्टीपाड़ा प्रखंड के अंतर्गत, घने जंगलो की पहाड़ियों में स्थित है। शिवरात्रि और सावन के दिनों में हजारों आदिवासी भगवान शिव की पूजा करने आते हैं ऐसा कहा जाता था एक समय में पहाड़िया राजाओं का वास होता था लेकिन वर्तमान में यहाँ सांपो का वास होता है। कंचनगढ़ गुफा के अंदर जाने के बाद कोई लौटकर नहीं आया।
कंचनगढ़ गुफा के अंदर से तीन रास्ते जाते हैं
यह गुफा आज भी रहस्यमय बनी हुई है, अंदर जाने के करीब 800 मीटर भगवान शिव का शिवलिंग है, आज तक कोई नहीं जा सका, बहुत से लोगों ने अंदर जाने की कोशिश की लेकिन जो भी अंदर पूजा और जल लेकर गया वो कभी वापस नहीं आया। कंचनगढ़ गुफा से तीन रास्ते जाते हैं जिसमें से एक शिवगद्दी (बाबा धाम), पशुपतिनाथ (काठमांडू नेपाल) और महाकालेश्व है लेकिन वर्तमान में इन रास्तों के बारे में कह पाना आसान नहीं है क्योंकि इसके साक्ष्य उपलब्ध नहीं है।

पहली गुफा:-
यह पहला रास्ता है जोकि शिवलिंग की तरफ जाता है, जाने के लिए लेट-लेट कर/ झुक-झुक कर जाता है क्योंकि अंदर जाने के लिए कोई रास्ता नहीं है, आस- पास सापों का वास होता है। बाबा जी बताते हैं “साँप काटते है लेकिन शिवलिंग तक जाने में ऑक्सीजन नहीं मिलती है इसलिये लोग नहीं जा पाते”।

दूसरी गुफा -:
ह रास्ता नेपाल की तरफ चला जाता है, करीब 400 वर्ष पहले पहाड़िया राजा यहाँ से शिवगद्दी तथा अन्य धर्मिक स्थलों पर पूजा करने के लिए जाते थे। लेकिन वर्तमान में गुफाएँ बंद हो गयी है और अंदर कोई नहीं जाता है।

तीसरी गुफा-
यह सबसे बड़ी गुफा है पहाड़ो के अंदर ही अंदर अनेक रास्ते है जोकि 1200 वर्ष पहले की बताई जाती है। सबसे ज्यादा गहरी,और दूर तक जाने वाली यही गुफा है पिछले कुछ वर्षों में हजारों लोगों ने अंदर जाने की कोशिश की लेकिन कोई अंदर तक नहीं जा सका। इसके मानचित्र में साफ दिखता है कि आज यहाँ भगवान शिव का वास है और जो बाबा यहाँ रहते है उनको आज तक किसी तरह की कोई बीमारी नहीं हुई।

यहाँ पर रहने वाले पहाड़ी समाज के बाबा से मुलाक़ात
मैंने भगवान शिव और माता पार्वती को साक्षात देखा है अंदर शिवलिंग में जब भी जाते हैं भगवान शिव दर्शन देते हैं, चारो तरफ साँपो का बसेरा है लेकिन आज तक किसी सांप ने नहीं काटा। सांप आएंगे, मेरे ऊपर से गुजर जाएंगे लेकिन काटते नहीं है। अब धीरे-धीरे यहाँ की गुफाएँ लुप्त हो रही है, सरकार ध्यान नहीं देती है, जब से झारखण्ड के पहाड़, और जंगलो को काटा जा रहा है तब से बारिस के पानी का झुकाव नीचे हो गया और यहाँ की गुफाओं में मिट्टी धस गयी। इसलिए मैं चाहता हूँ, झारखण्ड की इस धरोहर को बचाकर रखा जाये।
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FAQ
यहाँ पुरे वर्ष झाड़ियों, झरनों से पानी आता है जिसको बहुत पवित्र मानकर प्रसाद की तरह पीते है चाहे गर्मी हो या सर्दी लेकिन पानी हमेसा आता है। सावन के महीने में आदिवासी मेला लगता है, बहुत दूर-दूर से लोग पूजा करने आते हैं।
हाँ, झारखण्ड के पाकुड़ जिले में पहाड़ियों से घिरा, ऊँचे पहाड़ में स्थित इस गुफा में आज भी साँपो का बरेसा है, ऐसा कहा जाता है सावन के महीने में यहाँ मेला लगता है उस समय भगवान शिव खुद दर्शन देते हैं। इस गुफा के अंदर साँपो का घर है इसलिये आज तक कोई भी अंदर नहीं जा सका।
यह तो कह पाना मुश्किल है लेकिन गुफा के पहले स्थान पर भगवान शिव का मंदिर है और ऐसा भी कहा जाता हैं यहाँ पहाड़िया राजाओं का वास होता था इसलिये इसकी देखभाल पहाड़िया समुदाय के बाबा, पुजारी करते हैं।
हाँ बिल्कुल, यहाँ भगवान शिव का वास है, पुराणों और इतिहासकारों से जानकरो मिलती है यहाँ तीन गुफाये है हो पूर्व, पश्चिम की तरफ जाती है। एक गुफा में 700 मीटर की दूरी पर भगवान शिव का शिवलिंग है जहाँ ओर लोग पूजा करने जाते हैं।
