इस विधानसभा का गठन 1951 में हुआ, अगले वर्ष पहला चुनाव हुआ जिसमें लगातार 1952, 1957 और 1962 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के क्रमशः Ramjanam Mahton, Bhola nath chaubey,syed manhood Ahmad ने जीत हासिल की थी लेकिन उसके बाद सीपीआई (CPI) के Nageshwar Prasad Singh ने 1967 ला चुनाव जीता। बिहार में ऐसी बहुत कम विधानसभा सीटें हैं जहां पर किसी एक दल का एकक्षत्र राज रहा हो लेकिन कहलगांव में कांग्रेस एक तरफ़ा चुनाव जीती हालांकि वर्तमान में बीजेपी के पवन कुमार यादव विधायक हैं।
कहलगांव से सदानंद सिंह का अनोखा रिस्ता
एक दौर था जब कांग्रेस पार्टी एक तरफ़ा चुनाव जीत जाती थी, उसमें यहाँ के नेताओं का बड़ा हाथ रहा जिसमें में कहलगांव विधानसभा से पूर्व विधायक और मंत्री सदानंद सिंह है, इन्होंने 9 बार एकतरफा चुनाव जीता लेकिन इनके जाने के बाद कांग्रेस के लिए चुनौती देखी जा सकती है।
कहलगांव से सदानंद सिंह का पहला चुनाव (1969)
- बर्ष 1969 के विधानसभा चुनाव में कहलगांव का नाम Colgong तथा विधानसभा संख्या 158 थी। कुल मतदाता 104141 थे जिसमें चुनाव के दौरान 62397 मतदाताओं ने मत का उपयोग किया जिसमें 36896 पुरुष तथा 25501 महिला मतदाता थी।
- इस तरह से सदानंद सिंह(24113) ने अपना पहला चुनाव सीपीआई (CPI) नेता नागेश्वर प्रसाद (22272) को 1840 वोटों से हराया।
सदानंद सिंह का दूसरा चुनाव (1972)
- वर्ष 1972 के विधानसभा चुनाव में कुल मतदाता 115342 थे जिसमें 57768 पुरुष, 57574 महिला थीं। चुनाव के दौरान मतदाता करने वालों की संख्या 57854, जिसमें 29683 पुरुष, 27991 महिला थे।
- इस विधानसभा चुनाव में सदानंद सिंह (26288) ने BJS के उम्मीदवार युद्धष्ठिर मंडल (12185) को 14103 मतों के अंतर से हरा दिया था।
सदानंद सिंह का तीसरा चुनाव (1977)
- पिछले 2 विधानसभा चुनावों में जिस तरह से सदानंद सिंह जीते उससे साफ हो गया था अब इनको हराने वाला कोई नेता नहीं है क्योंकि कि पहले सीपीआई (CPI) में उम्मीदवार नागेश्वर प्रसाद को हराया उसके अगले ही चुनाव में BJS के उम्मीदवार युद्धष्ठिर मंडल को, इस तरह जनता के चाहते नेता बन गये थे।
- इस विधानसभा चुनाव में भी उन्होंने JMP उम्मीदवार बलराम चन्द्र घोष को 3898 मतों से करारी सिकस्त दी। इस चुनाव में कुल मतदाता 121114 थे जिसमें 62748 पुरुष, 58366 महिला थीं। मतदान के अनुसार 62209 मतदाताओं ने अपना मत किया जिसमें 38182 पुरुष, 24027 महिला थीं।
सदानंद सिंह का चौथा चुनाव (1980)
- 1980 में जिस तरह बिहार में जय प्रकाश नरायण का JP आंदोलन चल रहा है उससे विहार के अनेक विधानसभा सीटों पर प्रभाव हुआ जिसमें कुछ सीटों पर जनसंघ जीत चुकी थीं और कुछ सीटों पर सीपीआई (CPI) का दबदबा बढ़ रहा था लेकिन कहलगांव (Colgong) की सीट पर लगातार चौथी बार सदानंद सिंह ने जीत हासिल की। उन्होंने JNP (SC) उम्मीदवार जागेश्वर मंडल को 38534 हराया।
सदानंद सिंह का पांचवा चुनाव (1985)
- 1985 के चुनाव में कहलगांव की कहलगांव की विधानसभा संख्या 166 कर दी गयी थी।पाँचवी बार सदानंद सिंह ने अपना परचम लहराया जिसमें उन्होंने कृष्ण मोहन सिंह को 12412 मतों से हराया।
- इसके सदानंद सिंह ने वर्ष 2000, 2005, 2010 और 2015 भी चुनाव जीते लेकिम उनके जाने के बाद यहाँ बदलाव हो गया।

चर्चा के दौरान लोगों ने बताया…..
सदानंद सिंह का अपना वोट बैंक माना जाता था जब तक चुनाव लड़ा, हराने वाला कोई नहीं था लेकिन वर्तमान में कांग्रेस के पास कोई अच्छा उम्मीदवार नहीं है इसलिये बीजेपी जीत गयी। क्योंकि 2020 में कांग्रेस ने सदानंद सिंह जी के बेटे को टिकट दिया लेकिन चुनाव हार गये।
यहाँ पर कुछ पंचायत है जहाँ सदानंद बाबू का वोट बैंक था, लेकिन वह वोट बैंक बीजेपी के खाते में चला गया वर्तमान कांग्रेस किसी भी नेता को टिकट देती है फिर भी जीतना मुश्किल है।
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FAQ
NDA के जीतने की सम्भावना है लेकिन जब तक स्वर्गीय सदानंद सिंह ने चुनाव लड़ा तब तक कांग्रेस का महबूत थी हालांकि 2020 के विधानसभा में कांग्रेस ने उनके बेटे शुभानंद मुकेश को टिकट दिया लेकिन चुनाव हार गये। पिछले वर्ष उन्होंने भी JDU का दामन थाम लिया इसलिये इस विधानसभा में महागठबंधन के पास कोई अच्छा नेता नहीं है जो चुनाव जीत सके।
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