जिस तरह से बिहार के दूसरे जिलों की विधानसभाओं में पहला चुनाव 1952,1957 में हुआ था उसी तरह कटिहार जिले की प्राणपुर विधानसभा (66) में पहला चुनाव सन 1977 में हुआ। यह वही समय था जब देश में इंद्रायुग और बिहार में जेपी युग अपमे चरम पर लोगों के ऊपर राज कर रहा था।
प्राणपुर विधानसभा का पुराना चुनावी समीकरण
- 1977 के पहले चुनाव में Mahendra Narayan Yadav ने जीता था जोकि Janata पार्टी से चुनाव मैदान में थे, उसके बाद 1980 में Mohammed Sakur ने indian National Congress,
- 1985 Mangan Insan तथा 1990 Mahendra Narayan Yadav ने जनता दल से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की।
- सन 1995, 2000 में Binod Kumar Singh Bharatiya Janata Party के टिकट पर चुनाव जीत हासिल की।
- 2005 Mahendra Narayan Yadav ने Rashtriya Janata Dal से जीत हासिल की।
- वर्तमान में बीजेपी से Nisha Singh विधायक हैं लेकिन क्या प्राणपुर से फिर से बीजेपी आएगी या महागठबंधन जीत जायेगा।
चुनावी माहौल क्या है ?
इस विधानसभा का क्षेत्र की सीमा बंगाल प्रदेश से मालदा जिले से लगती है, इसलिए यहाँ पर हिंदू- मुस्लिम की धराणा देखी जाती है। महत्वपूर्ण यह है कि जब से चुनाव हुआ, तब से लेकर वर्तमान तक (1977-2020) भारतीय जनता पार्टी का दबदबा रहा है इसीलिए 4 बार जीत हासिल की।
सबसे पहले विनोद कुमार सिंह सन 2000 के विधानसभा चुनाव में जीत हासिल की, उसके बाद 2010, 2015 में चुनाव जीता। हालांकि अगले चुनाव में उनका टिकट काट कर महिला उम्मीदवार निशा सिंह को टिकट दिया गया और उन्होंने जीत हासिल की। हमारी टीम ने विधानसभा में अलग-अलग क्षेत्रों में लोगों से बात की जिसमें (Labha, Pranpur) हैं।
निशा सिंह को आप जानते हैं?
यह मेरे यहाँ की विधायका हैं आती-जाती रहती है अभी कुछ दिनों से आना जाना हुआ है पहले नहीं आती थी आगे हसते हुये…… चुनाव आने वाला है सायद इसलिए आना शरू हो गया हो।

किस तरह की नेता हैं?
नेता तो अच्छी है लेकिन जिस तरह से जनता के बीच आना चाहिए, और उनके सुख- दुख में साथ रहना चाहिए वैसे नहीं है, वैसे इनके जीतना सम्भावना नहीं थी लेकिन अंतिम चरण में जीत गयी थी। यहाँ पर हिन्दू- मुस्लिम ज्यादा होता है, सर (रिपोर्टर से बताते हुये) जहाँ पर आप खड़े है वह बिहार- बंगाल का बॉर्डर है इसलिए यहाँ मोदी को लोग भगवान मानते हैं लेकिन ऐसा लोगों की बेबकूफी है।
आपको क्या लगता हैं प्राणपुर विधानसभा में किसका दबदबा है?
सर, सच कहें तो इस बार महागठबंधन के जीतने के चांस लग रहे है हालांकि पिछले चुनाव में महागठबंधन की तरफ से कांग्रेस के उम्मीदवार को उतारा गया था, यदि राजद का कोई भी उम्मीदवार होता तो जीत जाता। यहाँ गांव-गांव में राजद के कार्यकर्त्ता हैं इसलिए मुझे लगता है महागठबंधन का जीतना लगभग तय है।
आपको लगता है यहाँ से कांग्रेस के उम्मीदवार को उतरना गलत साबित हुआ?
बिल्कुल सही बात है, निशा सिंह तो पहले ही चुनाव हार जाती यदि महेंद्र नारायण यादव (RJD) से टिकट मिला जाता इसलिए अब जनता ने मूड बना लिया कि प्राणपुर से महागठबंधन को जिताएंगे।
महागठबंधन की तरफ किसका उम्मीदवार होना चाहिए?
इस क्षेत्र के महेंद्र नारायण यादव बहुत अच्छे नेता हैं, पहले भी 2 बार विधायक रह चुके हैं यदि उमको टिकट मिलता है तो महागठबंधन को कोई नहीं हरा सकता है इसलिए राजद का उम्मीदवार होना चाहिए।
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Journalismology का निष्कर्ष
हमारी टीम ने रोड पर जाते हुये आम नागरिक, बाल काटने वाले नाई तथा चौक पर बैठे बुजुर्गो से बात की। जिस प्रकार से लोगों अपनी राय दी उससे लगता है वर्ष 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में बहुत बदलाव होगा इसमें कुछ बड़े नेताओं की हार भी होगा और कुछ नये राजनैतिक दलों का उदय भी।
FAQ
महागठबंधन का, जिस तरह से लोगों के रुझान आ रहे हैं उससे है इस विधानसभा में कुछ बड़ा बदलाव होगा, हो सकता है सत्ता परिवर्तन भी हो और नीतीश कुमार अपना चुनाव हार भी जाये।
महागठबंधन का, जिस तरह 80% युवाओं का मानना है कि बिहार में युवा मुख्यमंत्री बने इसलिए मुख्यमंत्री दौड़ में तेजस्वी यादव सबसे आगे हैं।
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