भारत का इतिहास समझने के लिए देश और दुनियां का इतिहास जानना अतिआवश्यक है, क्योंकि जिस समय भारत में ईस्ट इंडिया कम्पनी आई थी उस समय दुनियां के अलग- अलग देशों में युद्ध चल रहा था, चाहे चीन-जापान युद्ध की बात हो या फिर दक्षिण अफ्रीका में महात्मागांधी जी का आंदोलन और वह पर संगठन की स्थापना करना हो, इसको समझने के लिए यह लेख बहुत महत्वपूर्ण हो जाता है जोकि चीन जापान युद्ध (1894-95) कारण और परिणाम पर आधारित है|
यह लेख अलग विश्वविद्यालयों, यूनिवर्सिटी B. A. History Honour की कक्षाओं में पढ़ाया जाता है|
- ग्रेट निकोबार द्वीप क्या है हिन्दी में निबंध लिखिए।
- बिहार चुनाव : फतुहा विधानसभा (185) राजनैतिक समीकरण, देखिये पूरी रिपोर्ट
- बिहार चुनाव : बेगूसराय विधानसभा (146) का राजनैतिक समीकरण, देखिये पूरी रिपोर्ट
- बिहार चुनाव : अररिया विधानसभा (49) का राजनैतिक समीकरण, देखिये पूरी रिपोर्ट।
- यूपी चुनाव 2027 : दलितों की मायावती से दूरिया क्यों बढ़ रही हैं, देखिये पूरी रिपोर्ट
चीन जापान युद्ध का परिचय :-
यह युद्ध चीन जापान के मध्य कोरिया पर प्रशासनिक तथा सैन्य नियंत्रण को लेकर लड़ा था, इसने जापान की मेजी सेना विजयी हुयी थी, इस युद्ध के परिणाम स्वरूप कोरिया, मंचूरिया तथा ताईवान का नियंत्रण जापान के हाथों में चला गया था | इस युद्ध को “प्रथम चीन जापान युद्ध भी कहा जाता है|
क्योंकि 1937 से 1945 के मध्य लड़े गये युद्ध को “ द्वतीय चीन जापान युद्ध कहा जाता है इस युद्ध के पश्चात जापान में सैन्यवाद को बढ़ावा मिला तथा जापान पूर्वी एशिया की प्रमुख सैन्य के रूप में उभर कर सामने आया| इस युद्ध के पश्चात चीन की कमजोरियां जापान ही नहीं बल्कि सभी साम्राज्यवादी शक्तियों के सामने खुले रूप में उभर कर आई और उनका पूर्ण रूप से शोषण किया गया|
चीन जापान युद्ध के कारण:-
युद्ध का प्रथम कारण पृथकता के बंधन को तोड़करआधुनिक विश्व की प्रतिद्वंदिता में हिस्सा लेना था, आधुनिक जापान ने विदेश नीति पर अमल करना आरम्भ कर दिया| इस व्यवहार से जापान विश्व को दिखाना चाहता था कि वह आसमान संधियों को मानने वाला देश नहीं है| वह सुदृढ़ और शक्तिशाली सेना वाला देश है | मेजी ने पुनःस्थापना इसमें महत्वपूर्ण भूमिका अदा की|
जापान ने अपने साम्राज्यवाद का मुख्य लक्ष्य चीन को बनाया आयर सर्वप्रथम कोरिया में उसे चीन के साथ अपनी शक्ति का प्रयोग किया | कोरिया अपनी सामाजिक और राजनीतिक द्रष्टि से जापान के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण था इसलिए कोरिया प्रायद्वीप में जापान की बहुत रूचि थी|
जापान में जनसँख्या वृद्धि के कारण:-
यहां जनसँख्या वृद्धि तथा औद्योगिकरण ने जापान में समस्याएं उत्त्पन्न कर दी थी तथा जापान अपनी जनसंख्या का हस्तांतरण कोरिया में करना चाहता था क्योंकि कोरिया भौगोलिक स्थित के अनुसार इसके अनुकूल था||
चीन और जापान दोनों ही कोरिया पर अपना अधिकार करना चाहते थे तथा जापान कोरिया में अपने साम्राज्यवाद को फैलाना चाहता था और अपनी सुरक्षा के लिए भी कोरिया पर नियंत्रण स्थापित करना आवश्यक था| वहीँ चीन में मांचू सम्राटों ने 17वीं शताब्दी में कोरिया पर अधिकार कर लिए और तभी से कोरिया चीन का अधीन प्रदेश माना जाने लगा| यद्यपि कोरिया क अपना प्रथक राजा होता था किन्तु कोरिया का स्वतन्त्र राजा चीन के सम्राट को अपना अधिपति स्वीकार करता था|
जापान तथा कोरिया के संबंध :-
जापान किसी भी यूरोपीय शक्ति की प्रभुसत्ता कोरिया में स्थापित नहीं होने देना चाहता था जब जापान अपने कमांडर “हिदेयोशी” के नेतृत्व एन विस्तारवाद पर अग्रसर हुआ तो उसने कोरिया अपर आधिपत्यं करना आवश्यक समझा| कोरिया ने इसका कड़ा विरोध किया कितु जापान सफ़ल रहा, इसके साथ- साथ छिंद राजवंश ने फिर से अपना कोरिया अपर अपना अधिकार जताना शुरू कर दिया था|
वर्ष 1868 में, जापान ने तीन शिष्टमंडल कोरिया में भेजा ताकि पुराने संबंधो को सुधारा जा सके, किन्तु कोरिया के राजा ने इसे इंकार कर दिया | इस अपमान का बदला लेने के लिए वर्ष 1875 में जापान की टुकड़ियों को कोरिया भेजा गया|
सैनिकों ने कोरिया में “कांधवा” का किला जीत लिया, इधर जापान के इस व्यवहार से विवस होकर चीन ने कोरिया को जापान के साथ संधि करने का निर्देश दिया| फरवरी 1876 में “कांधवा की संधि” पर हस्ताक्षर किये गये, इस विधि से कोरिया पर चीन की प्रभुसत्ता समाप्त हो गयी | इधर चीन के जापान के प्रभाव को कम करने के लिए सभी पश्चिमी देशों को कोरिया के साथ व्यापार करने तथा राजनीतिक संबंध स्थापित करने की अनुमति दे दी |
- ग्रेट निकोबार द्वीप क्या है हिन्दी में निबंध लिखिए।
- बिहार चुनाव : फतुहा विधानसभा (185) राजनैतिक समीकरण, देखिये पूरी रिपोर्ट
- बिहार चुनाव : बेगूसराय विधानसभा (146) का राजनैतिक समीकरण, देखिये पूरी रिपोर्ट
- बिहार चुनाव : अररिया विधानसभा (49) का राजनैतिक समीकरण, देखिये पूरी रिपोर्ट।
- यूपी चुनाव 2027 : दलितों की मायावती से दूरिया क्यों बढ़ रही हैं, देखिये पूरी रिपोर्ट
- Bihar Election 2025
- Career Guidance
- Country
- Education
- india history
- Literature
- MCQ QUIZ
- NCERT का इतिहास
- Politics
- SSC CGL
- Uttar pradesh
- इतिहास के पन्ने
- झारखण्ड का इतिहास
- देश दुनियां
- बुंदेलखंड का इतिहास
- भारतीय इतिहास
- भारतीय राजनीति इतिहास
- भारतीय राजनेता
- सामाजिक अध्यन
FAQ
जापान तथा कोरिया के चीच वर्ष 1875 फरवरी में हुयी थी|
वर्ष 1937 से 1945 के मध्य लड़े गये युद्ध को “ द्वतीय चीन जापान युद्ध कहा जाता है|
वर्ष 1894-95 में, इन दोनों देशों के बीच लड़ा प्रथम युद्ध था|
